Friday, 17 March 2017

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Thursday, 5 January 2017

6 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

6 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

2002 - भारत ने सीमा में घुस आया पाकिस्तान का जासूसी विमान मार गिराया, दक्षेस शिखर सम्मेलन सम्पन्न, काठमाण्डू घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खात्में पर ज़ोर, भारत की राजनीतिक सफलता, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री  टोनी ब्लेयर व भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बातचीत के बाद दिल्ली घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर, बांग्लादेश की मुद्रा से शेख़ मुजीब का चित्र हटाया गया, संयुक्त राज्य अमेरीका में एक और विमान भवन से टकराया।

2003 - रूस ने संयुक्त राष्ट्र से बिना अनुमति लिये इराक के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई पर अमेरिका को चेतावनी दी।

2007 - उत्तर प्रदेश का हिन्दी संस्थान की ओर से साहित्य के क्षेत्र में दिये जाने वाले वार्षिक पुरस्कारों के अंतर्गत वर्ष 2007 के भारत भारती सम्मान केदारनाथ सिंह को प्रदान करने की घोषणा हुई।

2008 -राज्यसभा सदस्य और बंगलुरू के उद्यमी तथा पूंजी और निवेश कंपनी जूपिटर कैपिटल के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव चन्द्रशेखर को फिक्की का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

अमेरिका के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में आए तूफ़ान से भारी तबाही।

2010- नई दिल्ली में यमुना बैंक-आनंद विहार सेक्शन की मेट्रो रेलों का परिचालन आरंभ।

6 जनवरी को जन्मे व्यक्ति

1910 - जी. एन. बालासुब्रमनियम, भारतीय कर्नाटक संगीतकार

1932 - कमलेश्वर - हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार

1959 - कपिल देव, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान

1966 - ए आर रहमान, ऑस्कर विजेता भारतीय संगीतकार

1996- किशन श्रीकांत, फ़िल्म निर्देशक, अभिनेता

🔴🏅1949 - बाना सिंह - परमवीर चक्र 🏅से सम्मानित भारतीय सेना के सूबेदार।

1918- भरत व्यास, बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार

1883 - ख़लील जिब्रान - विश्व के श्रेष्ठ चिंतक महाकवि के रूप में ख्याति प्राप्त करने वाले महान दार्शनिक।

1928 - विजय तेंदुलकर - भारतीय नाटककार और रंगमंचकर्मी।

1940 - नरेन्द्र कोहली - प्रसिद्ध लेखक।

6 जनवरी को हुए निधन

1847 - त्यागराज - प्रसिद्ध कवि तथा कर्नाटक संगीत के संगीतज्ञ।

1852 - लुई ब्रेल - नेत्रहीनों के लिये ब्रेल लिपि का निर्माण करने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति

1885 - भारतेन्दु हरिश्चंद्र, आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रवर्तक, जिन्होंने हरिश्चंद्र मैगजीन, कविवचन सुधा जैसी पत्रिका निकाली तथा अंधेरनगरी और भारत दुर्दशा आदि अनेक नाटक लिखा।

2008 - प्रमोद करण सेठी - प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सक।

2009- जी.एम. शाह, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री

📕📕📕
🇮🇳🇮🇳बाना सिंह🇮🇳🇮🇳



पूरा नाम:;नायब सूबेदार बाना सिंह

जन्म::6 जनवरी, 1949

जन्म भूमि::काद्‌याल गाँव, जम्मू और कश्मीर

पुरस्कार-उपाधि::परमवीर चक्र (1987)

नागरिकता::भारतीय

रैंक:;सूबेदार, मेजर, कैप्टन

यूनिट;;8 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंटरी

सक्रिय वर्ष::1969 से 2000 तक

अन्य जानकारी::सियाचिन में जो चौकी बाना सिंह ने फ़तह की, उनका नाम बाद में 'बाना पोस्ट' रख दिया गया|

🔴 6 जनवरी, 1949 काद्‌याल गाँव, जम्मू और कश्मीर) परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय व्यक्ति है।

इन्हें यह सम्मान सन 1987 में मिला। पाकिस्तान के साथ भारत की चार मुलाकातें युद्धभूमि में तो हुई हीं, कुछ और भी मोर्चे हैं, जहाँ हिन्दुस्तान के बहादुरों ने पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेर कर रख दिया। सियाचिन का मोर्चा भी इसी तरह का एक मोर्चा है, जिसमें 8 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंटरी के नायब सूबेदार बाना सिंह को उसकी चतुराई, पराक्रम और साहस के लिए परमवीर चक्र दिलवाया।

🔴 जीवन परिचय

बहादुर नायब सूबेदार बाना सिंह का जन्म 6 जनवरी 1949 को जम्मू और कश्मीर के काद्‌याल गाँव में हुआ था। 6 जनवरी 1969 को उनका फौजी जीवन शुरू हुआ थ और वह अपनी इस यूनिट में आए थे। सियाचिन में जो चौकी बाना सिंह ने फ़तह की, उनका नाम बाद में 'बाना पोस्ट' रख दिया गया। बाना सिंह ने इस कार्यवाही के लिए परमवीर चक्र पाया। उन्होंने कारगिल की लड़ाई का हाल भी जाना-सुना। उस समय तक वह फौज की सेवा में कार्यरत थे।

🔴फौजी जीवन

सियाचिन के बारे में दूर बैठकर केवल कल्पना ही की जा सकती है, वह भी शायद बहुत सही ढांग से नहीं। समुद्र तट से 21 हजार एक सौ तिरपन फीट की ऊचाँई पर स्थित पर्वत श्रणी, जहाँ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से बर्फानी हवाएँ चलती ही रहती हैं और जहाँ का अधिकतम तापमान -35° C सेल्सियस होता है वहाँ की स्थितियों के बारे में क्या अंदाज लगाया जा सकता है। लेकिन यह सच है कि यह भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण जगह है।

1949 में कराची समझौते के बाद, जब युद्ध विराम रेखा खींची गई थी, तब उसका विस्तार, जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में उत्तर की तरफ खोर से लेकर दक्षिण की ओर मनावर तक था। इस तरह यह रेखा उत्तर की तरफ NJ9842 के हिमशैलों (ग्लेशियर्स) की तरह जाती है। इस क्षेत्र में घास का एक तिनका तक नहीं उगता है, साँस लेना तक सर्द मौसम के कारण बेहद कठिन है।

लेकिन कुछ भी हो, यह ठिकाना ऐसा है जहाँ भारत, पाकिस्तान और चीन की सीमाएँ मिलती है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से इसका विशेष महत्त्व है।
हमेशा की तरह अतिक्रमण और उकसाने वाली कार्यवाही पाकिस्तान द्वारा ही यहाँ भी की गई। पहले तो उसने सीमा तय होते समय 5180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जो भारत का होता उसे चीन की सीमा में खिसका दिया। इसके अलावा वह उस क्षेत्र में विदेशी पर्वतारोहियों को और वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए बाहर के लोगों को भी बुलवाता रहता है, जब कि वह उसका क्षेत्र नहीं हैं। इसके अतिरिक्त भी उसकी ओर से अनेक ऐसी योजनाओं की खबर आती रहती है जो अतिक्रमण तथा आपत्तिजनक कही जा सकती है। यहाँ हम जिस प्रसंग का ज़िक्र विशेष रूप से कर रहे हैं, वह वर्ष 1987 का है। इसमें पाकिस्तान ने सियाचिन ग्लेशियर पर, भारतीय सीमा के अन्दर अपनी एक चौकी बनाने का आदेश अपनी सेनाओं को दे दिया। वह जगह मौसम को देखते हुए, भारत की ओर से भी आरक्षित थी। वहाँ पर पाकिस्तान सैनिकों ने अपनी चौकी खड़ी की और 'कायद चौकी' का नाम दिया। यह नाम पाकिस्तान के जनक कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना के नाम पर रखा गया था।

उस चौकी की संरचना समझना भी बड़ा रोचक है। वह चौकी, ग्लेशियर के ऊपर एक दुर्ग की तरह बनाई गई, जिसके दोनों तरह 1500 फीट ऊँची बर्फ की दीवारें थीं। इसे पाकिस्तान ने अपनी यह चौकी 'कायद' बड़ी चुनौती की तरह, भारत की सीमा के भीतर बनाई थी, जिसे अतिक्रमण के अलावा कोई और नाम नहीं दिया जा सकता। जाहिर है, भारत के लिए इस घटना की जानकारी पाकर चुप बैठना सम्भव नहीं था। भारतीय सेना ने यह प्रस्ताव बनाया कि हमें इस चौकी को वहाँ से हटाकर उस पर अपना कब्जा कर लेना है। इस प्रस्ताव के जवाब में नायब सूबेदार बाना सिंह ने खुद आगे बढ़कर यह कहा कि वह इस काम को जाकर पूरा करेंगे। वह 8 जम्मू कश्मीर लाइट इंफेस्टरी में नायब सूबेदार थे। उन्हें इस बात की इजाज़त दे दी गई। नायब सूबेदार बाना सिंह ने अपने साथ चार साथी और लिए और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ लिए। योजना के अनुसार बटालियन के दूसरे लोग पाकिस्तान दुश्मन के सैनिकों को उलझा कर रखे रहे और उधर बाना सिंह और उनके साथियों ने उस चौकी तक पहुँचने का काम शुरू कर दिया।
'कायद पोस्ट' की सपाट दीवार पर, जो कि बर्फ की बनीं थी, उस पर चढ़ना बेहद कठिन और जोखिम भरा काम था। इसके पहले भी कई बार इस दीवार पर चढ़ने ने की कोशिश हिन्दुस्तानी सैनिकों की थी और नाकाम रहे थे। रात का तापमान शून्य से भी तीस डिग्री नीचे गिरा हुआ था।

तेज हवाएँ चल रही थी। पिछले तीन दिनों से लगातार जबरदस्त बर्फ गिर रही थी। भयंकर सर्दी के कारण बन्दूकें भी ठीक काम नहीं कर रहीं थीं। खैर, अँधेरे का फायदा उठाते हुए बाना सिंह और उनकी टीम आगे बढ़ी रही थी।

रास्ते में उन्हें उन भारतीय बहादुरों के शव भी पड़ी दिख रहे थे जिन्होंने यहां पहुँचने के रास्ते में प्राण गँवाए थे। जैसे-तैसे बाना सिंह अपने साथियों को लेकर ठीक ऊपर तक पहुँचने में कामयाब हो गये। वहाँ पहुँच कर उसने अपने दल को दो हिस्सें में बाँटकर दो दिशाओं में तैनात किया और फिर उस 'कायद पोस्ट' पर ग्रेनेड फेंकने शुरू किया।

वहाँ बने बंकरों में ग्रेनेड ने अपना काम दिखाया। साथ ही दूसरे दल के जवानों ने दुश्मन के सैनिकों को, जोकि उस चौकी पर थे, बैनेट से मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया। वहां पर पाकिस्तान के स्पेंशल सर्विस ग्रुप (SSG) के कमांडो तैनात थे, जो इस अचानक हमले में मारे गए औ कुछ चौकी छोड़कर भाग निकले। कुछ ही देर में वह चौकी दुश्मनों के हाथ से भारतीय बहादुरों के हाथ में आ गई।

🔴मोर्चा फ़तह हुआ था। बाना सिंह समेत उनका दल सही सलामत उस पर काबिज हो गया।


बजट के प्रकार ( Types of Budget ) बजट प्रायः पांच प्रकार के होते हैं , जो निम्नलिखित हैं :

बजट के प्रकार ( Types of Budget )
बजट प्रायः पांच प्रकार के होते हैं , जो
निम्नलिखित हैं :
1 . पारम्परिक अथवा आम बजट ( Aam
budget )
2 . निष्पादन बजट ( Performance
budget )
3 . शून्य आधारित बजट (Zero based
budget )
4 . परिणामोन्मुख बजट ( Outcome
budget )
5 . लैंगिक बजट ( Gender budget )
पारम्परिक अथवा आम बजट ( Aam
Budget )
वर्तमान समय के ‘ आम बजट ’ का
प्रारंभिक स्वरूप ‘पारम्परिक
बजट ’ ( Traditional budget ) कहलाता
है।
आम बजट का मुख्य उद्देश्य
विधायिका (legislature ) का
कार्यपालिका ( executive ) पर
‘वित्तीय नियंत्रण ’ ( financial
control ) स्थापित करना है।
इस बजट में सरकार की
आय (income ) और
व्यय (expenditure ) का वार्षिक
लेखा-जोखा होता है।
इस बजट में सरकार किस क्षेत्र में
कितना धन व्यय करेगी, उसका उल्लेख
तो करती है किन्तु इस व्यय से क्या -
क्या परिणाम प्राप्त होंगे उनका
ब्योरा नहीं दिया जाता है।
अतः इस प्रकार के बजट का मुख्य उद्देश्य
सरकारी खर्चों पर नियंत्रण करना तथा
विकास कार्यों को अंजाम देना था न कि
तीव्र गति से विकास। जिसके परिणामस्वरूप
पारम्परिक बजट की यह पद्धति स्वतंत्र भारत
की समस्याओं को सुलझाने तथा विकास के
लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थ रही। यही
कारण है कि भारत में ‘ निष्पादन
बजट ’ ( Performance budget ) की आवश्यकता
तथा महत्त्व को स्वीकार किया गया तथा इसे
परम्परागत बजट के ‘पूरक’ के रूप में प्रस्तुत किया
जाता है।
निष्पादन बजट ( Performance Budget )
कार्य के परिणामों (result) को
आधार बनाकर निर्मित किया जाने
वाला बजट ‘निष्पादन
बजट ’ ( Performance
budget ) कहलाता है।
निष्पादन बजट मूलतः
‘लक्ष्योन्मुखी’ ( Target
oriented ) तथा ‘उद्देश्य
परक’ (Objective oriented ) प्रणाली
पर आधारित होता है जिसमें केवल
संगठनात्मक आय - व्यय का हिसाब ही
नहीं बल्कि ‘कार्य के परिणामों ’ को
मूल्यांकन का आधार बनाया जाता
है।
नोटः विश्व में सर्वप्रथम ‘निष्पादन बजट ’ का
प्रारंभ संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ जहां
प्रशासनिक सुधारों के लिए हूपर
आयोग ( 1949 ) का गठन किया गया। जिसके
अनुसार, ‘निष्पादन बजट में सरकार क्या कर रही
है ? कितना कर रही है ? तथा कितनी कीमत पर
कर रही है ? इन सभी बातों को सम्मिलित
किया गया। ’
भारत में निष्पादन बजट को उपलब्धि
बजट या कार्यपूर्ति बजट भी कहा
जाता है।
शून्य आधारित बजट ( Zero Based Budget )
इस बजट को अपनाने के दो प्रमुख कारण हैः
1 . देश के बजट में निरंतर पाया जाने
वाला घाटा (व्यय ↑ आय ↓ )।
2 . निष्पादन बजट प्रणाली का सफल
क्रियान्वयन न हो पाना।
उपरोक्त दोनों कारणों ने इस बात की
आवश्यकता पर जोर दिया कि, देश के बजट में
लगातार बढ़ते घाटे पर अंकुश लगाने के लिए व्यय
में कटौती करना आवश्यक है।
यह बजट प्रणाली विगत वर्षों में किए
गए व्ययों पर विचार नहीं करती और न
ही विगत वर्षों के व्ययों को भावी
वर्ष के लिए प्रयुक्त करती है बल्कि यह
प्रणाली इस बात पर बल देती है कि
व्यय किया जाए या नहीं अर्थात्
प्रश्न यह नहीं कि व्यय में कितनी
वृद्धि एवं कितनी कमी की जाए
बल्कि प्रश्न यह है कि व्यय किया
जाए या नहीं ?
इस बजट प्रणाली में प्रत्येक
क्रियाकलाप के लिए ‘शून्य
आधार ’ ( Zero based ) से पुनः औचित्य
निर्धारित करना पड़ता है अर्थात्
पुराने व्ययों पर नये व्ययों का
प्रावधान नहीं किया जाता बल्कि
पुनः प्रारंभ से औचित्य निर्धारित
किया जाता है।
इस प्रणाली में प्रत्येक क्रियाकलाप
का परीक्षण ठीक उसी प्रकार
किया जाता है जिस प्रकार किसी
नए प्रस्ताव का परीक्षण करके यह
निर्णय लिया जाता है कि यह कार्य
आवश्यक है या नहीं।
इस प्रणाली को ‘सूर्य अस्त बजट ’ ( Sun
set budget system) प्रणाली भी
कहा जाता है जिसका अर्थ है कि
वित्तीय वर्ष के सूर्य अस्त होने से पहले
प्रत्येक विभाग को एक शून्य
आधारित बजट प्रस्तुत करना होता है
जिसमें उसके प्रत्येक क्रियाकलाप का
लेखा-जोखा रहता है।
नोटः
Zero Based Budget का जनक पीटर
ए - पायर ( 1970 ) को माना जाता है
और इस प्रणाली का सर्वप्रथम
प्रयोग 1973 में अमेरिका के
जार्जिया प्रान्त के बजट में
तत्कालीन गवर्नर जिमी कार्टर
द्वारा अपनाया गया। बाद में इसे
अमेरिका के राष्ट्रीय बजट (1979 ) में
भी अपनाया गया।
भारत में इस प्रणाली की शुरूआत एक
प्रमुख शोध संगठन ‘ वैज्ञानिक तथा
औद्योगिक अनुसंधान
परिषद् ’ ( Council of Scientific and
Industrial Research) द्वारा किया
गया और केंद्र सरकार ने 1987 – 88 के
बजट से इसे लागू करने का निर्णय
किया।
भारत के वित्त मंत्रलय (Finance
Ministry ) के अधीन कार्यरत ‘व्यय
विभाग’ ने केंद्र सरकार के विभिन्न
मंत्रलयों एवं विभागों में जीरो बेस
बजटिंग लागू करने के लिए एक विस्तृत
दिशा -निर्देश बनाने के लिए वित्तीय
सलाहकारों की एक समिति नियुक्त
की।
केंद्र सरकार के अतिरिक्त विभिन्न
राज्य सरकारें अनुपयोगी होती जा
रही अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों
पर होने वाले भारी- भरकम व्ययों को
कम करने के उद्देश्य से इस प्रणाली का
प्रयोग कर रही है।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश तथा अन्य कई
राज्य सरकारों ने ‘ शून्य आधारित
बजट ’ ( Zero based budgeting ) का
प्रयोग वर्ष 1987 – 88 से ही लागू करने
का फैसला किया।
मध्य प्रदेश और राजस्थान की
सरकारों ने इस प्रणाली को
वर्ष 1995 -96 से सभी विभागों में
सख्ती से लागू करने का फैसला
किया।
वर्तमान में लगभग सभी राज्य
सरकारों द्वारा पूर्णरूप से न सही
किन्तु आंशिक रूप से इस प्रणाली को
अपनाया जा रहा है।
परिणामोन्मुखी बजट ( Outcome
Budget )
देश में हर साल बड़ी संख्या में विकास से
संबंधित योजनाएं , जैसे — मनरेगा , एनआरएचएम ,
मध्यान्ह भोजन योजना , प्रधानमंत्री ग्राम
सड़क योजना एवं भारत निर्माण , आदि शुरू
होती हैं। इन योजनाओं पर भारी भरकम
धनराशि खर्च की जाती है परन्तु इन योजनाओं
को अमली - जामा किस हद तक पहनाया गया
अर्थात यह योजनाएं अपने लक्ष्यों को प्राप्त
करने में कहां तक सफल रही हैं इसे मापने के लिए
कोई खास पैमाना निर्धारित नहीं है।
योजनाओं के लटके रहने से लागतों में वृद्धि हो
जाती है। इससे होने वाले नुकसान की
जिम्मेदारी तय करने के लिए भी कोई तंत्र
उपलब्ध नहीं है। इस तरह की कई कमियों को दूर
करने की कोशिश देश के पहले आउटकम बजट ,
जिसे 2005 में पेश किया गया , में की गयी
जिसके अन्तर्गत आम बजट में आवंटित धनराशि
का विभिन्न मंत्रलयों और विभागों ने क्या
और कैसे उपयोग किया , का ब्योरा देना
आवश्यक था ?
परिणामोन्मुख बजट ( outcome budget ) इसका
रिपोर्ट कार्ड है। यह मंत्रलयों और विभागों के
कार्य प्रदर्शन में एक ‘मापक ’ का भी काम
करता है जिससे सेवा , निर्माण प्रक्रिया ,
कार्यक्रमों के मूल्यांकन और परिणामों को और
अधिक बेहतर बनाया जा सकता है। इससे यह
निश्चित हो जाता है कि outcome budget के
जरिये विकास कार्यक्रमों को और भी अधिक
प्रभावी बनाया जा सकता है और उनके लिए
निर्धारित लक्ष्यों की आपूर्ति की सही -सही
जानकारी भी मिल सकती
है।
लैंगिक बजट ( Gender Budget )
वर्तमान बजट में उन तमाम योजनाओं और
कार्यक्रमों पर जिनका संबंध महिला और शिशु
कल्याण से है कितना धन आवंटित किया गया
इसका उल्लेख ही लैंगिक बजट ( gender
budgeting ) माना जाता है। लैंगिक बजट के
माध्यम से सरकार , ‘महिलाओं के विकास,
कल्याण और सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं
और कार्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष एक
निर्धारित राशि की व्यवस्था सुनिश्चित करने
का प्रावधान करती है। ’

आप इन महासागरीय जलधाराओं को Trick के माध्यम से निम्न प्रकार याद कर सकते है

आप इन महासागरीय जलधाराओं को Trick
के माध्यम से निम्न प्रकार याद कर सकते है
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*प्रमुख ठंडी जलधाराऐ*
Trick – [हम बोले ग्रीन
बगुला क्यों केला FAK (फ़ेंक) रहा है ]
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
हम बो – हम्बोल्ट की धारा
ले – लेब्रोडोर की धारा
ग्रीन – ग्रीनलैंड
की धारा
बगुला – बेंगुऐला की धारा
क्यों – क्युराइल की धारा
केला – कैलीफ़ोर्निया की धारा
F - फ़ाकलैंड की धारा
A - आखोस्टक की धारा
K - कनारी की धारा
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इस तरह आपको ठंडी जलधाराऐं याद
हो जाऐंगी और
बाकी बची हुई जलधाराऐं गरम
होंगी !!

भारत के प्रमुख दर्रे की Tricks

भारत के प्रमुख दर्रे की Tricks
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भारत के प्रमुख दर्रे
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जम्मू कश्मीर के प्रमुख दर्रे-

 TRICK-"जो पीर का बाबू"Note-इस Trick में एक शब्द "पीर" आया है जो मुस्लिम के धर्मगुरुओ को कहा जाता है अतः मुस्लिम बहुल राज्य "जम्मू कश्मीर" हे।जो-

1-जोजिला दर्रा  (जोजिला दर्रे का निर्माण सिन्धु नदी द्वारा हुआ है।)
2-पीर-पीरपंजाल दर्रा का
3-काराकोरम  दर्रा (लद्दाख क्षेत्र में स्थित काराकोरम दर्रा भारत का सबसे ऊँचा दर्रा 5624 मिटर है। यहाँ से चीन को जाने वाली एक सड़क बनाई गयी है।)
4-बा-बनिहाल दर्रा (बनिहाल दर्रे से जम्मू से श्रीनगर जाने का मार्ग गुजरता है।  जवाहर सुरंग इसी में स्थित है।)
5-बू-बुर्जिल दर्रा (बुर्जिल दर्रा श्रीनगर से गिलगित को जोडती है।)

उत्तराखण्ड के प्रमुख दर्रे-

TRICK-"नीलिमा"Note-"नीलिमा" इसमे "नील" का मतलब नीलकंठ भोलेनाथ से हे अर्थात उत्तराखंड में केदार नाथ जिससे हम यह trick किस राज्य  की है का नाम भी याद रख सकते हे।
1-नी-निति दर्रा
2-लि-लिपुलेख दर्रा
3-मा-माना दर्रा

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे-

TRICK-"हिरोशिमा बड़ा"
हि-हिमाचल प्रदेश
1-रो-रोहतांग दर्रा
2-शिमा-शिपकला दर्रा (इसका निर्माण सतलज नदी से होता है जो शिमला से तिब्बत को जोड़ता है।)
3-बड़ा-बड़ालाचा दर्रा

सिक्किम के प्रमुख दर्रे-

TRICK-"नाथूलाल सिक्किम जायेगा"

1-नाथूलाल-नाथूला दर्रा
सिक्किम-सिक्किम राज्य के दर्रे जायेगा-
2-जैलेप्ला दर्रा (जैलेप्ला का निर्माण तीस्ता नदी द्वारा होता है।)

मणिपुर का दर्रा
TRICK-"तुम"
1-तु-तुजू दर्रा
म-मणिपुर राज्य

अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे TRICK-"अरुण का दिया बुझा"
अरुण-अरुणाचल प्रदेश "का-Silent" दिया
1-दिफू दर्रा
2-बुझा-बोम्डिला दर्रा

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Live Virtual Classroom STD: 9 to 12 Home Learning date:04/08/2020

Welcome to the Virtual Class Standard: 9 to 12 under the Home Learning Program by Samagra Shiksha. Date: 04/08/2020  ◆Standard: 9  ...