Thursday, 5 January 2017

बजट के प्रकार ( Types of Budget ) बजट प्रायः पांच प्रकार के होते हैं , जो निम्नलिखित हैं :

बजट के प्रकार ( Types of Budget )
बजट प्रायः पांच प्रकार के होते हैं , जो
निम्नलिखित हैं :
1 . पारम्परिक अथवा आम बजट ( Aam
budget )
2 . निष्पादन बजट ( Performance
budget )
3 . शून्य आधारित बजट (Zero based
budget )
4 . परिणामोन्मुख बजट ( Outcome
budget )
5 . लैंगिक बजट ( Gender budget )
पारम्परिक अथवा आम बजट ( Aam
Budget )
वर्तमान समय के ‘ आम बजट ’ का
प्रारंभिक स्वरूप ‘पारम्परिक
बजट ’ ( Traditional budget ) कहलाता
है।
आम बजट का मुख्य उद्देश्य
विधायिका (legislature ) का
कार्यपालिका ( executive ) पर
‘वित्तीय नियंत्रण ’ ( financial
control ) स्थापित करना है।
इस बजट में सरकार की
आय (income ) और
व्यय (expenditure ) का वार्षिक
लेखा-जोखा होता है।
इस बजट में सरकार किस क्षेत्र में
कितना धन व्यय करेगी, उसका उल्लेख
तो करती है किन्तु इस व्यय से क्या -
क्या परिणाम प्राप्त होंगे उनका
ब्योरा नहीं दिया जाता है।
अतः इस प्रकार के बजट का मुख्य उद्देश्य
सरकारी खर्चों पर नियंत्रण करना तथा
विकास कार्यों को अंजाम देना था न कि
तीव्र गति से विकास। जिसके परिणामस्वरूप
पारम्परिक बजट की यह पद्धति स्वतंत्र भारत
की समस्याओं को सुलझाने तथा विकास के
लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थ रही। यही
कारण है कि भारत में ‘ निष्पादन
बजट ’ ( Performance budget ) की आवश्यकता
तथा महत्त्व को स्वीकार किया गया तथा इसे
परम्परागत बजट के ‘पूरक’ के रूप में प्रस्तुत किया
जाता है।
निष्पादन बजट ( Performance Budget )
कार्य के परिणामों (result) को
आधार बनाकर निर्मित किया जाने
वाला बजट ‘निष्पादन
बजट ’ ( Performance
budget ) कहलाता है।
निष्पादन बजट मूलतः
‘लक्ष्योन्मुखी’ ( Target
oriented ) तथा ‘उद्देश्य
परक’ (Objective oriented ) प्रणाली
पर आधारित होता है जिसमें केवल
संगठनात्मक आय - व्यय का हिसाब ही
नहीं बल्कि ‘कार्य के परिणामों ’ को
मूल्यांकन का आधार बनाया जाता
है।
नोटः विश्व में सर्वप्रथम ‘निष्पादन बजट ’ का
प्रारंभ संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ जहां
प्रशासनिक सुधारों के लिए हूपर
आयोग ( 1949 ) का गठन किया गया। जिसके
अनुसार, ‘निष्पादन बजट में सरकार क्या कर रही
है ? कितना कर रही है ? तथा कितनी कीमत पर
कर रही है ? इन सभी बातों को सम्मिलित
किया गया। ’
भारत में निष्पादन बजट को उपलब्धि
बजट या कार्यपूर्ति बजट भी कहा
जाता है।
शून्य आधारित बजट ( Zero Based Budget )
इस बजट को अपनाने के दो प्रमुख कारण हैः
1 . देश के बजट में निरंतर पाया जाने
वाला घाटा (व्यय ↑ आय ↓ )।
2 . निष्पादन बजट प्रणाली का सफल
क्रियान्वयन न हो पाना।
उपरोक्त दोनों कारणों ने इस बात की
आवश्यकता पर जोर दिया कि, देश के बजट में
लगातार बढ़ते घाटे पर अंकुश लगाने के लिए व्यय
में कटौती करना आवश्यक है।
यह बजट प्रणाली विगत वर्षों में किए
गए व्ययों पर विचार नहीं करती और न
ही विगत वर्षों के व्ययों को भावी
वर्ष के लिए प्रयुक्त करती है बल्कि यह
प्रणाली इस बात पर बल देती है कि
व्यय किया जाए या नहीं अर्थात्
प्रश्न यह नहीं कि व्यय में कितनी
वृद्धि एवं कितनी कमी की जाए
बल्कि प्रश्न यह है कि व्यय किया
जाए या नहीं ?
इस बजट प्रणाली में प्रत्येक
क्रियाकलाप के लिए ‘शून्य
आधार ’ ( Zero based ) से पुनः औचित्य
निर्धारित करना पड़ता है अर्थात्
पुराने व्ययों पर नये व्ययों का
प्रावधान नहीं किया जाता बल्कि
पुनः प्रारंभ से औचित्य निर्धारित
किया जाता है।
इस प्रणाली में प्रत्येक क्रियाकलाप
का परीक्षण ठीक उसी प्रकार
किया जाता है जिस प्रकार किसी
नए प्रस्ताव का परीक्षण करके यह
निर्णय लिया जाता है कि यह कार्य
आवश्यक है या नहीं।
इस प्रणाली को ‘सूर्य अस्त बजट ’ ( Sun
set budget system) प्रणाली भी
कहा जाता है जिसका अर्थ है कि
वित्तीय वर्ष के सूर्य अस्त होने से पहले
प्रत्येक विभाग को एक शून्य
आधारित बजट प्रस्तुत करना होता है
जिसमें उसके प्रत्येक क्रियाकलाप का
लेखा-जोखा रहता है।
नोटः
Zero Based Budget का जनक पीटर
ए - पायर ( 1970 ) को माना जाता है
और इस प्रणाली का सर्वप्रथम
प्रयोग 1973 में अमेरिका के
जार्जिया प्रान्त के बजट में
तत्कालीन गवर्नर जिमी कार्टर
द्वारा अपनाया गया। बाद में इसे
अमेरिका के राष्ट्रीय बजट (1979 ) में
भी अपनाया गया।
भारत में इस प्रणाली की शुरूआत एक
प्रमुख शोध संगठन ‘ वैज्ञानिक तथा
औद्योगिक अनुसंधान
परिषद् ’ ( Council of Scientific and
Industrial Research) द्वारा किया
गया और केंद्र सरकार ने 1987 – 88 के
बजट से इसे लागू करने का निर्णय
किया।
भारत के वित्त मंत्रलय (Finance
Ministry ) के अधीन कार्यरत ‘व्यय
विभाग’ ने केंद्र सरकार के विभिन्न
मंत्रलयों एवं विभागों में जीरो बेस
बजटिंग लागू करने के लिए एक विस्तृत
दिशा -निर्देश बनाने के लिए वित्तीय
सलाहकारों की एक समिति नियुक्त
की।
केंद्र सरकार के अतिरिक्त विभिन्न
राज्य सरकारें अनुपयोगी होती जा
रही अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों
पर होने वाले भारी- भरकम व्ययों को
कम करने के उद्देश्य से इस प्रणाली का
प्रयोग कर रही है।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश तथा अन्य कई
राज्य सरकारों ने ‘ शून्य आधारित
बजट ’ ( Zero based budgeting ) का
प्रयोग वर्ष 1987 – 88 से ही लागू करने
का फैसला किया।
मध्य प्रदेश और राजस्थान की
सरकारों ने इस प्रणाली को
वर्ष 1995 -96 से सभी विभागों में
सख्ती से लागू करने का फैसला
किया।
वर्तमान में लगभग सभी राज्य
सरकारों द्वारा पूर्णरूप से न सही
किन्तु आंशिक रूप से इस प्रणाली को
अपनाया जा रहा है।
परिणामोन्मुखी बजट ( Outcome
Budget )
देश में हर साल बड़ी संख्या में विकास से
संबंधित योजनाएं , जैसे — मनरेगा , एनआरएचएम ,
मध्यान्ह भोजन योजना , प्रधानमंत्री ग्राम
सड़क योजना एवं भारत निर्माण , आदि शुरू
होती हैं। इन योजनाओं पर भारी भरकम
धनराशि खर्च की जाती है परन्तु इन योजनाओं
को अमली - जामा किस हद तक पहनाया गया
अर्थात यह योजनाएं अपने लक्ष्यों को प्राप्त
करने में कहां तक सफल रही हैं इसे मापने के लिए
कोई खास पैमाना निर्धारित नहीं है।
योजनाओं के लटके रहने से लागतों में वृद्धि हो
जाती है। इससे होने वाले नुकसान की
जिम्मेदारी तय करने के लिए भी कोई तंत्र
उपलब्ध नहीं है। इस तरह की कई कमियों को दूर
करने की कोशिश देश के पहले आउटकम बजट ,
जिसे 2005 में पेश किया गया , में की गयी
जिसके अन्तर्गत आम बजट में आवंटित धनराशि
का विभिन्न मंत्रलयों और विभागों ने क्या
और कैसे उपयोग किया , का ब्योरा देना
आवश्यक था ?
परिणामोन्मुख बजट ( outcome budget ) इसका
रिपोर्ट कार्ड है। यह मंत्रलयों और विभागों के
कार्य प्रदर्शन में एक ‘मापक ’ का भी काम
करता है जिससे सेवा , निर्माण प्रक्रिया ,
कार्यक्रमों के मूल्यांकन और परिणामों को और
अधिक बेहतर बनाया जा सकता है। इससे यह
निश्चित हो जाता है कि outcome budget के
जरिये विकास कार्यक्रमों को और भी अधिक
प्रभावी बनाया जा सकता है और उनके लिए
निर्धारित लक्ष्यों की आपूर्ति की सही -सही
जानकारी भी मिल सकती
है।
लैंगिक बजट ( Gender Budget )
वर्तमान बजट में उन तमाम योजनाओं और
कार्यक्रमों पर जिनका संबंध महिला और शिशु
कल्याण से है कितना धन आवंटित किया गया
इसका उल्लेख ही लैंगिक बजट ( gender
budgeting ) माना जाता है। लैंगिक बजट के
माध्यम से सरकार , ‘महिलाओं के विकास,
कल्याण और सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं
और कार्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष एक
निर्धारित राशि की व्यवस्था सुनिश्चित करने
का प्रावधान करती है। ’

आप इन महासागरीय जलधाराओं को Trick के माध्यम से निम्न प्रकार याद कर सकते है

आप इन महासागरीय जलधाराओं को Trick
के माध्यम से निम्न प्रकार याद कर सकते है
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*प्रमुख ठंडी जलधाराऐ*
Trick – [हम बोले ग्रीन
बगुला क्यों केला FAK (फ़ेंक) रहा है ]
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हम बो – हम्बोल्ट की धारा
ले – लेब्रोडोर की धारा
ग्रीन – ग्रीनलैंड
की धारा
बगुला – बेंगुऐला की धारा
क्यों – क्युराइल की धारा
केला – कैलीफ़ोर्निया की धारा
F - फ़ाकलैंड की धारा
A - आखोस्टक की धारा
K - कनारी की धारा
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इस तरह आपको ठंडी जलधाराऐं याद
हो जाऐंगी और
बाकी बची हुई जलधाराऐं गरम
होंगी !!

भारत के प्रमुख दर्रे की Tricks

भारत के प्रमुख दर्रे की Tricks
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भारत के प्रमुख दर्रे
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जम्मू कश्मीर के प्रमुख दर्रे-

 TRICK-"जो पीर का बाबू"Note-इस Trick में एक शब्द "पीर" आया है जो मुस्लिम के धर्मगुरुओ को कहा जाता है अतः मुस्लिम बहुल राज्य "जम्मू कश्मीर" हे।जो-

1-जोजिला दर्रा  (जोजिला दर्रे का निर्माण सिन्धु नदी द्वारा हुआ है।)
2-पीर-पीरपंजाल दर्रा का
3-काराकोरम  दर्रा (लद्दाख क्षेत्र में स्थित काराकोरम दर्रा भारत का सबसे ऊँचा दर्रा 5624 मिटर है। यहाँ से चीन को जाने वाली एक सड़क बनाई गयी है।)
4-बा-बनिहाल दर्रा (बनिहाल दर्रे से जम्मू से श्रीनगर जाने का मार्ग गुजरता है।  जवाहर सुरंग इसी में स्थित है।)
5-बू-बुर्जिल दर्रा (बुर्जिल दर्रा श्रीनगर से गिलगित को जोडती है।)

उत्तराखण्ड के प्रमुख दर्रे-

TRICK-"नीलिमा"Note-"नीलिमा" इसमे "नील" का मतलब नीलकंठ भोलेनाथ से हे अर्थात उत्तराखंड में केदार नाथ जिससे हम यह trick किस राज्य  की है का नाम भी याद रख सकते हे।
1-नी-निति दर्रा
2-लि-लिपुलेख दर्रा
3-मा-माना दर्रा

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे-

TRICK-"हिरोशिमा बड़ा"
हि-हिमाचल प्रदेश
1-रो-रोहतांग दर्रा
2-शिमा-शिपकला दर्रा (इसका निर्माण सतलज नदी से होता है जो शिमला से तिब्बत को जोड़ता है।)
3-बड़ा-बड़ालाचा दर्रा

सिक्किम के प्रमुख दर्रे-

TRICK-"नाथूलाल सिक्किम जायेगा"

1-नाथूलाल-नाथूला दर्रा
सिक्किम-सिक्किम राज्य के दर्रे जायेगा-
2-जैलेप्ला दर्रा (जैलेप्ला का निर्माण तीस्ता नदी द्वारा होता है।)

मणिपुर का दर्रा
TRICK-"तुम"
1-तु-तुजू दर्रा
म-मणिपुर राज्य

अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे TRICK-"अरुण का दिया बुझा"
अरुण-अरुणाचल प्रदेश "का-Silent" दिया
1-दिफू दर्रा
2-बुझा-बोम्डिला दर्रा

*भारत की मिट्टियां*

*भारत की मिट्टियां*
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1. भारत के कृषि अनुसंधान परिषद् ने भारत की मिट्टियों को कितने भागों में बांटा है ?
Ans- आठ भागों में :-
-जलोढ़ मिट्टी
-लेटेराइट मिट्टी                            
-पीटमय और जैव मिट्टी
-काली मिट्टी
-मरुस्थलीय मिट्टी
-वनीय मिट्टी
-लाल मिट्टी
-क्षारीय मिट्टी

2. जलोढ़ मिट्टी भारत के कितने प्रतिशत भाग पर पाई जाती है ?
Ans- 22 प्रतिशत

3. जलोढ़ मिट्टी की खासियत क्या है ?
Ans-यह नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी है । इसमें उर्वरता काफी होती है ।

4. जलोढ़ मिट्टी में किसकी मात्रा सबसे अधिक होती है ?
Ans-पोटाश

5. बांगर किसे कहते हैं ?
Ans-पुराने जलोढ़ मिट्टी को ।

6. खादर किसे कहते हैं ?
Ans-नई जोलढ़ मिट्टी को ।

7. जलोढ़ मिट्टी में कौन-सी फसलें उगाई जाती हैं ?
Ans-धान, गेहूं, मक्का, तिलहन, दलहन, आलू इत्यादि ।

8. काली मिट्टी का निर्माण कैसे होता है ?
Ans-बेसाल्ट चट्टानों के टूटने-फूटने से ।

9. काली मिट्टी में किस खनिज की बहुलता होती है ?
Ans-आयरन, चूना, एल्युमीनियम एवं मैग्नेशियम ।

10. काली मिट्टी का रंग काला क्यों होता है ?
Ans- मैग्नेटाइट एवं जीवाश्म की उपस्थिति के कारण ।

11. किस मिट्टी को रेगुर मिट्टी के नाम से जाना जाता है ?
Ans-काली मिट्टी

12. कपास की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी उपयुक्त होती है ?
Ans-काली मिट्टी

13. लाल मिट्टी का निर्माण कैसे होता है ?
Ans-रवेदार एवं कायांतरित शैलों के विघटन एवं वियोजन से ।

14. इस मिट्टी में किसकी बहुलता होती है ?
Ans-सिलिका और आयरन ।

15. लाल मिट्टी का रंग लाल क्यों होता है ?
Ans-लौह ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण ।

16. लाल मिट्टी में किन फसलों की खेती की जाती है ?
Ans-कपास, गेहूं, दालें और मोटी अनाजें ।

17. किस मिट्टी में चूना मिलाकर उसकी उर्वरता बढ़ाई जा सकती है ?
Ans-लाल मिट्टी

18. चाय की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है ?
Ans-लेटेराइट मिट्टी

19. लेटेराइट मिट्टी में किसकी बहुलता होती है ?
Ans-आयरन और सिलिका

Daily GK Update : 05th January, 2017

Daily GK Update : 05th January, 2017

1. महेंद्र सिंह धोनी ने टी-20 और वनडे क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ी

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बुधवार (04 जनवरी 2017) को बताया कि महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय टी-20 और वनडे क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ दी है. हालांकि, वह इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली टी-20 और वनडे सीरीज़ में चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे. 283 वनडे और 73 टी-20 मैच खेलने वाले धोनी की कप्तानी में भारत सभी फॉर्मेट में नंबर-1 बना.


2. पिचाई ने लॉन्च किया टूल, 10 मिनट में वेबसाइट बनाने में करेगा मदद

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने 'माय बिज़नेस' के नाम से ऐसा टूल पेश किया जो भारत के छोटे कारोबारियों को स्मार्टफोन की मदद से महज 10 मिनट में मुफ्त वेबसाइट बनाने में मदद करेगा. पिचाई ने फिक्की के साथ मिलकर 'डिजिटल अनलॉक्ड' ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किया. अगले तीन साल के दौरान गूगल देश के 40 शहरों में 5000 ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित करेगी.


3. आरबीआई ने पेटीएम को पेमेंट बैंक के लिए दी मंज़ूरी

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने मोबाइल वॉलेट और ई-कॉमर्स कंपनी पेटीएम को पेमेंट बैंक शुरू करने की औपचारिक मंज़ूरी दे दी है. पेटीएम का परिचालन करने वाली कंपनी वन97 ने बताया कि उसका पेमेंट बैंक फरवरी से परिचालन शुरू कर सकता है और इसकी पहली ब्रांच नोएडा (उत्तर प्रदेश) में खोली जाएगी. गौरतलब है कि पेमेंट बैंक लोगों से 1 लाख रु प्रति खाता तक की रकम जमा कर सकते हैं.


4. एलपीजी के लिए ऑनलाइन भुगतान करने पर मिलेगी 5 रु.छूट

तेल कंपनियों ने कहा है कि एलपीजी सिलिंडर ऑनलाइन बुक करने या भुगतान करने पर 5रु की छूट मिलेगी. कंपनियों ने यह फैसला नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की सरकार की नीति के तहत लिया है. इससे पहले, सरकार ने डिजिटल माध्यम से पेट्रोल और डीज़ल खरीदने वाले ग्राहकों को 0.75% छूट देने की घोषणा की थी.


5. महिला विश्व कप क्वालीफ़ायर्स में मिताली राज होंगी भारतीय कप्तान

अनुभवी खिलाड़ी मिताली राज, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के विश्व कप क्वालीफ़ायर्स के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान होंगी जो 3 फरवरी से 21 फरवरी 2017 तक श्रीलंका के कोलोंबो में खेला जाएगा.



6. यूपी के मेरठ में डिजी धन मेला आयोजित

उत्तर प्रदेश में, बहुप्रतीक्षित डिजी धन मेला का आयोजन केंद्र सरकार और वित्तीय संस्थाओं द्वारा मेरठ में 04 जनवरी 2017 को आयोजित किया गया. इन मेलों के माध्यम से, आम लोगों को उच्च स्तर पर डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसके लिए उन्हें विशेष ऑफर भी दी जा रही हैं जैसे उपभोक्ताओं के लिए लकी ग्राहक योजना और व्यापारियों के लिए डिजी-धन व्यापार योजना.


7. संयुक्त राष्ट्र ने 2017 को विकास के लिए स्थायी पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में  घोषित किया

 संयुक्त राष्ट्र की 70 वीं महासभा ने 2017 को विकास के लिए स्थायी पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मान्यता प्रदान की है. यह मान्यता  अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के विकास और विशेष रूप से स्थायी पर्यटन के महत्व को दर्शाता है. यह लोगों के बीच बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए तथा विभिन्न सभ्यताओं की समृद्ध विरासत के प्रति जागरूकता लाने के लिए और विभिन्न संस्कृतियों के निहित मूल्यों की बेहतर सराहना करने के लिए तथा सबसे महत्वपूर्ण विश्व में शांति को मजबूत बनाने में योगदान करने के लिए किया गया है.


8. भारतीय रिजर्व बैंक ने सुरेखा मरांडी को कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्त किया

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने कार्यकारी निदेशक यू एस पालीवाल, जोकि 31 दिसंबर, 2016 को सेवानिवृत्त हुए, के स्थान पर सुरेखा मरांडी को कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया. सुरेखा मरांडी, जोकि उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण विभाग, वित्तीय समावेशन एवं विकास विभाग के बाद इस पद को ग्रहण करेंगी.


9. आर्थर मोरिस को आईसीसी क्रिकेट का हॉल ऑफ़ फेम प्रदान किया गया

आर्थर मॉरिस, जोकि आईसीसी क्रिकेट के हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले 82 वें खिलाड़ी बने, यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत प्रदान किया गया. आर्थर रॉबर्ट मॉरिस एक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर थे जिन्होंने 1946 से 1955 के बीच 46 टेस्ट मैच खेले थे. मॉरिस ऑस्ट्रेलिया के एक सलामी बल्लेबाज थे जिन्हें विश्व में सबसे बड़े बाएं हाथ के बल्लेबाजों में से एक माना जाता है.


10. 5 भारतीय अमेरिकियों न्र अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य के रूप में शपथ ली

5 भारतीय अमेरिकियों कमला हैरिस, अमी बेरा, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति और प्रमिला जयपाल ने अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य के रूप में शपथ ली है .संयुक्त राज्य कांग्रेस, संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार के दो कक्षों सीनेट और प्रतिनिधि सभा से मिलकर बनी द्विसदनीय विधायिका है.

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